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आशीष अनचिन्हार- गजल

In anchinhar on October 15, 2009 at 11:58 am

बम सँ डेड़ाएल अछि मनुख सँ हेमान धरि
जानवर तँ जानवर भगवत्ती सँ भगवान धरि

नीकक लेल सोहर खरापक लेल समदाउन
गाबि रहल गबैआ सोइरी सँ श्मसान धरि

समालोचना केकरा कहैछ छैन्ह किनको बूझल
अछि सगरो पसरल निन्दा सँ गुणगान धरि

राम नाम केर लूटि थिक लूटि सकी त लूटू
लूटि रहल छथि अगबे दक्षिणा पंडित सँ जजमान धरि

  1. समालोचना केकरा कहैछ छैन्ह किनको बूझल
    अछि सगरो पसरल निन्दा सँ गुणगान धरि

    nik anchihar ji aa diyabatik shubhkamna