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कथा- पता नहि डोमा पढ़लक आकि नहि-गजेन्द्र ठाकुर

In पता नहि डोमा पढ़लक आकि नहि on December 17, 2008 at 9:24 pm

“हे! हम डोमाकेँ पढ़ा लिखा कए किछु बनबय चाहैत छी । “ बुछन पासवान बाजल ।

चण्डीगढ़मे रिक्शा चलबैत छथि । गाममे खेती – बारीमे किछु नहि बचलैक । छोटका भाय सम जनमिते मरि जाइत रहय से डोमक हाथसँ एकटा छोटका भायकेँ जनमलाक बाद माय – बाप बेचलन्हि आऽ फेर पाइ दऽ किनलन्हि । ई समटा काज ओना तँ सांकेतिक रूपेँ भेल मुदा एहिसँ ग्रह कटित भऽ गेलैक । आऽ छोटका भाय जे बुधन पासवानसँ १२ बरिख छोट रहए बचि गेलाह । आऽ ताहि द्वारे ओकरा सम डोमा कहि सोर करए लगलाह । बुधन अपन बाप – मायक संग हरवाही करथि मुदा भायकेँ पढ़ेबाक बड्ड लालसा रहन्हि । सुनैत छिअए जे हमरा सभमे कनिओ पढ़ि – लिखि लेलासँ नोकरी भेटि जाइत छैक । एकरा जरूर पढायब, चाहे ताहि लेल पेट काटय पड़य आकि भीख माँगय पड़य ।

मुदा गाममे जे स्कूल रहय ओतय किओ टा दलित आकि गरीबक बच्चा नहि पढ़ैत रहथि। सरकार एकटा योजना चलेलक , दलितक बच्चा सभकेँ बिना पाइ लेने किताब बाँटबाक । किताब लेबाक लेल घर-घर जाऽ कए यादव जी मास्टर साहेब बच्चा सभकेँ स्कूल बजेलन्हि , नाम बिना फीसक , मासूलक लिखओलन्हि । सम हफता – दस दिन अएबो कएल स्कूल दुसधटोलीसँ , चमरटोलीसँ , धोबिया टोलीसँ । सभकेँ किताब भेटलैक आऽ सभ सप्ताहक-दस दिनक बाद निपत्ता भऽ जाइ गेलाह । देखा –देखी कमरटोली आऽ हजामटोलीक बच्चा सभ सेहो अएलाह पढ़य, किताब मँगनीमे भेटबाक लोभे । मुदा ओतए ई कहल गेल जे अहाँ सभ पैघ जातिक छी, मुफत, किताब योजना अहाँ सन धनिकक लेल नहि छैक ।

“बाबू ई काटए बला गप छैक की, छोट-छोटे होइत छैक आऽ पैघ – पैघे । स्टेटक आइ तकक सभसँ नीक चीफ-मिनिस्टर कर्पूरी ढाकुर भेल छैक, की नञि छै हौ असीम झा “ ।

जयराम ठाकुर असीन जीक केश अपन खोपड़ीक टूटल चारसँ हुलकैत सूर्यक प्रकाशक आसनीपर कटैत बजलाह।

“ से तँ बाबू ठीके “ । असीम बजलाह ।

से गाममे फेर ब्राहाण आऽ पछिमा-भूमिहारकेँ छोड़ि आर क्यो स्कूलमे पढ़ए बला नहि बँचल । अदहरमे सभटा किताब ई लोकनि किनैत गेलाह ।

“ हे अदहरसँ बेसीमे नहि देब , मानलहुँ किताब नव अछि, मुदा अहाँ सभकेँ तँ मँगनीयेमे ने भेटल अछि “।

आऽ दुसध टोली, चमरटोली आऽ धोबिया टोलीसँ सभटा किताब सहटि कऽ निकलि गेल ।

पता नहि डोमा पढ़लक आकि नहि।

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