माटिक बासन
लाल-लाल अछि
गोल-गोल अछि कटगर
माटिक छाँछी दही जमओलनि
उज्जर, कठगर, सोन्हगर
छथि कुम्हार ओ धन्य-धन्य
जे भारी चाक घुमाबथि
माटि-पानिसँ चाकक ऊपर
नाना रूप बनाबथि
आंगुर छुआ, इशारा देलनि
माटि धयल नव रूप
लाल सुराहीमे जल झाँपल
घरमे छोटकी कूप
माटिक मुरुत बनइ सल्हेसक
कहबइ गामक देब
बड़ पवित्र अछि
माटिक बासन
सुन्दर आर सुरेब
