पहिने हमर नाम पूछल गेल
ओ नहि पतियाएल
फेर ओकर नजरि
हमर गरदनि दिस गेलै
ओ नहि परखि सकल जे ओतए
बद्धी छै कि ताबीज
तखन ओ हमरा नाँगट क’ देलक सरेआम
ओकरा तैयो विश्वास नहि भेलै
अन्ततः ओ हमरा मारि देलक
मुदा आश्चर्य
एकर बादो ओ निश्चिन्त कहाँ अछि?
पहिने हमर नाम पूछल गेल
ओ नहि पतियाएल
फेर ओकर नजरि
हमर गरदनि दिस गेलै
ओ नहि परखि सकल जे ओतए
बद्धी छै कि ताबीज
तखन ओ हमरा नाँगट क’ देलक सरेआम
ओकरा तैयो विश्वास नहि भेलै
अन्ततः ओ हमरा मारि देलक
मुदा आश्चर्य
एकर बादो ओ निश्चिन्त कहाँ अछि?
| raj mishra on अफरल पेट- मनीष झा "बौआ… | |
| sourav894 on About | |
| PRAVEEN KUMAR KARN on मिथिलांगन- मैथिली भाषा पारिवार… | |
| satendra chauhan on आशीष अनचिन्हार- गजल | |
| Akash Kumar on नताशा 01 (चित्र-श्रृंखला पढ़बाक… |
Read in your own script
Roman(Eng)
Gujarati
Bangla
Oriya
Gurmukhi
Telugu
Tamil
Kannada
Malayalam
Hindi
Via chitthajagat.in
| M | T | W | T | F | S | S |
|---|---|---|---|---|---|---|
| « Dec | ||||||
| 1 | 2 | 3 | ||||
| 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 |
| 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 |
| 18 | 19 | 20 | 21 | 22 | 23 | 24 |
| 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | |
Blog at WordPress.com. Theme: DePo Masthead by Automattic.