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Archive for the ‘यथा एन्नी तथा ओन्नी एन्नी-ओन्नी तथैव च’ Category

गजल- आशीष अनचिन्हार

In आशीष अनचिन्हार, गजल, यथा एन्नी तथा ओन्नी एन्नी-ओन्नी तथैव च on March 4, 2009 at 8:43 am

गजल

यथा एन्नी तथा ओन्नी एन्नी-ओन्नी तथैव च
यथा माए तथा बाप मुन्ना-मुन्नी तथैव च

बलू हमर करेज जरैए अहाँ गीत लिखै छी
यथा भँइ तथा अच्छर पन्ना-पन्नी तथैव च

देखहक हो भाइ बोंगहक पोता कोना करै हइ
यथा मुल्ला तथा पंडित सुन्ना-सुन्नी तथैव च

देवतो जड़ि पकड़ै हइ मुहेँ देखि कए बचले रहू
यथा मौगी तथा भूत ओझा-गुन्नी तथैव च

बान्हि क भँइ दूरा पर मगबै ढ़ौआ पर ढ़ौआ
यथा समधी तथा समधीनी बन्ना-बन्नी तथैव च

की करबहक हो भगवान एमरी सभ के
यथा मरनाइ तथा जिनाइ रौदी-बुन्नी तथैव च

बचले रहिअह अनचिन्हार एहि गाम मे सदिखन
यथा साँप तथा मनुख जहर चिन्नी तथैव च

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