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आमंत्रण- श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर (१९३६- )

In आमंत्रण, रवीन्द्रनाथ ठाकुर on March 17, 2009 at 9:51 am

ककरो दैछ निमंत्रण खाट
सब दिन सुतले रहबाले
हमरो दैछ निमंत्रण बाट
हरदम चलिते रहबाले।
ककरो पवन झुलाबय झुलना
सपना देखिते रहबाले।
हमरा पवन छुबैये देह
सिहरल सिहरल उठबाले।
हमरा खातिर पवन कमाल
हमरा खातिर पवन रुमाल
हमरा किरण कहैए झात
सबटा दुख हरि लेबाले
हमरा सोर करैय बाध
बाधक पारक नील आकाश
हमरा पंछीसँ अधिक प्रेम
गगनक आँचर सुँघबाले।
मानल थीक प्रलय केर राति
मन घबड़ाथि कथीले
हम तऽ हर-सिङ्गारक फूल
हरदम झरिते रहबाले।
सोना बनबा केर इच्छुक तऽ
आगिक डऽर कतेक दिन
हम तऽ धधरा लेल पजारि
अनुखन जरिते रहबाले॥

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