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विधिक विधान-कथा- लिली रे

In कथा, लिली रे, विधिक विधान on April 22, 2009 at 8:27 am

पानमती खटनारि माउगि छल। सब ठाम ओकर माँग छलै। चाहे कतबो राति कसुतए, पाँच बजे भोरे ओकर नीन टूटि जाइ। छबजे ओ काज पर बहरा जाए। तीन घरमे बासन मँजैत छल, घर बहाड़ैत-पोछैत छल, कपड़ा धोइत छल। साढ़े एगारह बजे अपन झुग्गीमे घुरैत छल।

झुग्गीमे सबसँ पहिने चटनी पीसैत छल। तकरा बाद स्टोव पर गेंट क गेंट रोटी पकबैत छल। ओकर बेटी तकरा बिल्डिंग साइट पर बेचैत छल। कुली-मजदूर टटका रोटी कीनए। चटनी मुफ्त भेटइ।

हिसाब-किताब पूनम राखए। ओ पाँच क्लास तक पढ़लि छल। स्कूलमे पाँचहि क्लास तक छलै। से भगेलइ तपानमती पूनमकें काज लगा देलकै। बासन माँजब घर पोछब नइं। पूनम करैत छल कपड़ामे इस्त्राी। फाटल कपड़ाक सिलाइ, बटन टाँकब। इसकूलिया बच्चाक माइ लोकनि पूनमकें मासिक दरमाहा पर रखने छलीह। सस्त पड़नि।

    चोरी, मुँहजोरी, दुश्चरित्राता-तीनूमे कोनो दोष पानमतीमे नइं छलै। झुग्गी कालोनीक लोककें ओकरासँ ईष्र्या होइ। नियोजक लोकनि लग पानमती सम्मानक पात्रा छल। पूनम आठ वर्षक छल जखन पानमती ओहि इलाकामे आएल। पचास टाका मास पर झुग्गी किराया पर नेने छल। आब ओकरा चारि टा अपन झुग्गी छलै। एकमे रहै छल। तीनटा किराया लगौने छल। सौ रुपैया मास प्रति झुग्गी। आब इच्छा छलै एकटा सब्जीक दोकान करबाक। दखली-बेदखलीवला नइं, रजिस्ट्रीवला दोकान। जकरा केओ उपटा नइं सकए। दुनू माइ-बेटी रुपैया जमा करहल छल। बेटी समर्थ भगेल रहै। तकर बियाह करबचाहैत छल। नीक घर-वर। विश्वासपात्रा।

पूनम पानि भरबा लेल लाइनमे ठाढ़ि छल। बुझि पड़लै जेना केओ ओकरा दिस ताकि रहल होइ। मुँह चीन्हार बुझि पड़लै। अधवयसू व्यक्ति। उज्जर-कारी केश। थाकल बगए। ताबत लाइन आगू घसकि गेलइ। पूनम सेहो बढ़ि गेल। आगू पाछू लोकक बीच अढ़ कलेलक। ओ लोक सेहो दोसर दिस मूड़ी घुरा लेलक।

पूनम सेहो तीन घरमे काज करैत छल। मुदा ओकरा देरीसँ जाइए पड़ै। तहिना देरीसँ अबैत छल। तीनू ठाम चाह-जलखइ भेटै। माइ-बेटी तीन ठाम नइं खा सकए। एक ठाम खाए, बाकी ठाम चाह पीबए। जलखइक पन्नी घर आनए। बेरहट रातिमे चलि जाइ। कहियो काल भानस करए।

पूनम जलखइ लबहराए तमाइ ठाढ़ि भेटइ। पूनमसँ दुनू पन्नी लमाइ घर घूरि जाइ। माइ जाबत अदृश्य नइं भजाइ, पूनम देखैत रहए। तखन पुनः काज पर जाए।

    फेर ओएह व्यक्ति सुझलइ। ओ पूनमकें नइं, पानमतीकें अँखियासि कदेखि रहल छल। दूरहि दूरसँ। पानमती निर्विकार भावसँ जा रहल छल।

    तकरा बाद ओ व्यक्ति नइं सुझलइ। पूनम सेहो बिसरि गेल।

पानमती स्टोव पर रोटी पकबैत छल। गरमीमे पसीनासँ सराबोर भजाइत छल। काज परसँ घूरए तसबसँ पहिने अपन झुग्गीक पाछू पाॅलिथिनक पर्दा टाँगए। पानिक कनस्तर आ मग राखए। तकरा बाद माइक बनाओल रोटी-चटनीक चंगेरी उठा साइट पर बेचजाए। पानमती स्टोव मिझा, स्थान पर राखि, नहाइ लेल जाए।

ओहि दिन रोटी कीननिहारक जमातमे ओहो व्यक्ति छल। सभक पछाति आएल। रोटी कीनबाक सती अपन गामक भाषामे बाजल-माइ कि एखनहुँ सुकरिया कहइ छउ? पूनम अकचकाइत पुछलकइ-अहाँ के छी?

    -तोंही कह जे हम के छियौ तोहर?-फेर ओएह भाषा।

    -बा… बू… !-पूनम कानलागल।

    -विधिक विधान! जहिया तकैत रहियौ, नइं भेटलें। आशा छुटि गेल तभेट गेलें। अकस्मातहि।

    -तों चुपहि किऐ पड़ा गेलह? हमरा लोकनिकें कतेक तरद्दुत उठाबपड़ल-पूनम कनैत बाजल।

-विधिक विधान। हमर दुर्भाग्य। भेल जे आब एहि ठाम किछु हुअवाला नइं। आन ठाम अजमाबी। गम्हड़ियावाली काज करैत छल। तइं भेल जे तोरा लोकनि भूखल नइं रहबें। कहि कजएबाक साहस नइं भेल। घूरि कअएलहुँ तने ओ नगरी, ने ओ ठाम। गउआँ सभक ओतए खोज लेबगेलहुँ तसुनलहुँ जे ओ बाट बहकि गेल। गाम नइं जा मजूरक संग चल गेल। कोनो पता नइं छलइक ओकरा सबकें।

धत्! हमर माइ ओहेन नइं अछि।-पूनमकें हँसी लागि गेलइ। छलछल आँखिसँ हँसैत बाजल, गामक लोक कंठ ठेका देने रहइ गाम घूरि जाइ लेल। जबर्दस्ती लजाइत। तइं माइ नुका कमंजूर मामाक मोहल्लामे आबि गेल।

    -मंजूर कतअछि?

    -पता नइं। मामा बड़ जोर दुखित पड़ि गेलै। दवाइ दारूमे सब पाइ खर्च भगेलै। रिकशा सेहो बेचपड़लै। पाछू नोएडामे ओकरे गामक कोनो साहेब रहथिन। सएह क्वार्टर देलखिन। रिकशा कीनै लेल पैंच देलखिन। शर्त रहनि जे मेमसाहेबकें स्कूल पहुँचाएब, आ घर आनब। तकर बीचमे अपना लेल चलाएब। मेमसाहेब डी. पी. एस.मे टीचर छली। पहिने भेंट करअबैत रहै। एक दूू बेर मामी, बच्चा सबकें सेहो अनने छल। आब तकत्ता वर्ष भगेलइ। कोनो पता नइं। मंजूर मामाक झुग्गी हमरा लोकनि कीनि लेलहुँ।

    -वाह।

    -तीन टा झुग्गी आर अछि। किराया पर लगौने छी। सबटा माइक बुद्धिसँ। तों की सब कएलह?

    -से सब सुनाबी तमहाभारत छोट भजेतइ। हम अभागल, दुर्बल लोक।

    -चलघर चल। माइ बाट तकैत होएत।

 

पानमती नहा कभीतर आबि चुकल छल, जखन पूनम आएल।

    -माइ, देख तहम ककरा अनलिऔ? चीन्हइ छही?

    पानमती चीन्हि गेलै। मुदा किछु बाजल नइं।

    -कोना छें?-ओ पुछलकइ।

    -एतेक दिनसँ जासूसी चलैत रहइ, बूझल नइं भेलइ जे कोना छी।-पानमती अपन पैरक औंठा दिस तकैत नहुँ-नहुँ बाजल।

    -तकर माने जे तोंहू चीन्हि गेलें।-ओ हँसबाक प्रयास कएलक।

    पानमती किछु उत्तर नइं देलकै। ओहिना अपन पैरक औंठा दिस तकैत रहल। पूनमक ध्यान ओहि दिस नइं गेलै। ओ अपनहि झोंकमे छल-आब लोकक सोझामे माइ पूनम कहैत अछि। मुदा जखन दुःखित पड़ैत छी तकहलगैत अछि-हमर सुकरिया, नीके भजो।-माथो दुखाइत तएकर हाथ पैर हेरा जाइत छै। कौखन नीको रहै छी तदुलार करलगैत अछि। मारि मलार-हमर अप्पन सुकरिया। सुकरी! की-कहाँ नाम दैत अछि। पूनम नाम ततोरे राखल थिक ने? स्कूलमे। नइं? के रखलक हमर नाम सुकरिया?

-गाममे। तोहर जन्म शुक्र कभेलौ, तें सब सुकरिया कहलगलौ। हमरा केहेन दन लागए। मुदा ओतेक लोकसँ के रार करए। एतअएलहुँ तनाम बदलि देलियौ। तोहर नाम पूनम। तोहर माइक नाम पानमती। आअपन नाम जागेश्वर मंडल।-पूनम ठठा कहँसलागल। जागेश्वरकें सेहो हँसी लागि गेलै। पूनम बाजल-कतेक सुखी रही हमरा लोकनि तहिया।

जागेश्वर लए सबसँ सुखक समय रहै ओ। मालिक सीमेण्ट, ईटाक खुचरा व्यापारी छल। अपन साइकिल ठेला छलै, जाहि पर समान एक ठामसँ दोसर ठाम पठबै। कइएक ठाम छोट छोट कच्चा गोदाम बनौने छल। तहीमे एक गोदाम लग एकटा झुग्गी जागेश्वर लेल सेहो बना देलकै। जागेश्वर अपन परिवार लअनलक। सामनेक कोठीमे पानमतीकें बासन मँजबाक काज भेटि गेलै। म्यूनिसिपल स्कूलमे पूनम पढ़लागल।

    मालिक रहै छल दक्षिण दिल्लीमे। अपन कोठी छलनि। तहीमे एक राति हुनकर परिवार सहित हत्या भगेलनि। पुलिस आ वारिस लोकनिक गहमागहमी हुअलागल। गोदामक जमीन मालिक केर नइं छलनि। जागेश्वरकें झुग्गी छोड़पड़लै। जाहि घरमे पानमती काज करैत छल, ततजगह खाली नइं छलै। दोसर एक कोठीमे टाट घेरि, टिनक छत द’, जगह देबा लेल राजी छलै, यदि पानमती ओहि कोठीक काज करब गछए। पानमती दुनू कोठीमे काज करलागल।

    जागेश्वरकें काज नइं भेटि रहल छलै। नब मालिक पुलिसक झमेला समाप्त होएबा तक प्रतीक्षा करकहलखिन। झमेला अनन्त भगेल छल। ओ मंजूरकें पकड़लक। मंजूर बाजल, हमर इलाकामे मजूरी बड़ कम छै। ओहि ठाम अधिकांश लोक नोकरिया। स्त्राीगण सब सेहो आॅफिस जाइत छथि। तैं ओहि ठाम घरक काज कएनिहारक मांग छै। पाइयो तहिना भेटै छै ओहि सब घरमे। छह बजे भोर जाउ, नौ बजेसँ पहिने काज खतम करू। घरवाली अपस्याँत भजाइत अछि जाड़मे। नागा भेल, पाइ कटि गेल। हमरा पोसाइत तकिऐ अबितहुँ एतेक दूर काज ताक’?

मंजूर प्रीतमपुरामे रहै छल। भिनसर बससँ उत्तर दिल्ली अबैत छल। जगदीशक संग मालिक केर साइकिल ठेला पर माल उघैत छल। साँझ कफेर बससँ घर घुरैत छल। ओहि ठाम मालिककें कोनो गोदाम नइं छलनि। मंजूर तीस टका मास किरायाक झुग्गीमे रहै छल। ओकर योजना छलै एकटा अपन रिक्शा किनबाक। तकर बाद अपन स्त्राीक काज छोड़ा देबाक।

मंजूरक योजना सुनि जागेश्वर सेहो योजना बनबैत छल। पानमती सेहो। जागेश्वरकें झुग्गीक किराया नइं लगैत छलै। तैं ओ अपनाकें मंजूरसँ अधिक भाग्यवान बुझैत छल। बुद्विमान सेहो। भविष्यमे ओ झुग्गी बनएबाक सोचैत छल।

    -पहिने जगह सुतारब। ठाम ठाम झुग्गी बना किराया पर लगा देबै। तखन तोरा काज करनइं पड़तौ।

    -नइं, हम काज नइं छोड़ब। झुग्गी किरायासँ साइकिल ठेला कीनब। एकटा नइं कइएक टा। माल उघै लेल किराया पर देबै।

    -मालिककें?-जागेश्वर कौतुकसँ पूछै। पानमतीकें हँसी लागि जाइ। पूनम सेहो हँसलागए।

    किछु नइं भेलै।

फरीदाबाद तक बउआएल। ढंगगर काज नइं भेटलै। शुभचिन्तक सब दिल्लीसँ बाहर भाग्य अजमएबाक सलाह देलकै। अपनहुँ सएह ठीक बुझि पड़लै। पानमती कन्नारोहट करत, ताहि डरसँ चुप्पहि चल गेल।

    पूनम नेना छल। तैयो ओ दिन मोन पड़ि गेलै। स्कूलसँ बहराएल तबाप फाटक लग ठाढ़ भेटलै।

    -नोकरी भेटलह?-पूनम पुछलकै।

    -भेटि जायत।

    -कत’?

    -बड़ी दूर। तों नीक जकाँ रहिहें। माइक सब बात मानिहें। जाइ छी।

    -कत?

    -काज ताक-जागेश्वरक आँखि छलछला गेलै।

    -नइं जाह।

    -फेर आबि जएबौ।

    जागेश्वर चल गेल। तीन मास जखन कोनो खबरि नइं भेटलै, पानमती पूनमक संग रघुनाथ रिक्शवाला लग गेल। ओकरहि गामक रहै। रघुनाथ बाकी गौंआं सबकें खबरि देलकै। सब पहुँचलै। घर घुरि जएबाक सलाह देलकै। पानमतीकें नइं रुचलै। सब जोर देबलगलै। पानमतीकें मानपड़लै। तय भेल जे अगिला मासक आठ तारीख कजे जमात गाम जाएत, ताहि संग पानमती आ पूनम सेहो रहत। सात तारीख कलोक आबि कजेतै अड्डा पर। ताबत पानमती दुनू घरसँ अपन दरमाहा उठा लिअय।

दुनू मलिकाइन दिल्ली छोड़बाक सलाह नइं देलखिन। कहलखिन, काज ताकए गेल छौ, घुरि अएतौ। चाहत तआब एत्तहु काज भेटि जेतै। हमरा लोकनि देखबै।

    -अपन लोकवेदक से विचार नइं छै। ओ आबि जाए तकहबै जे हमरा जल्दी गामसँ लआबए।-पानमती बाजल।

  मंजूर भेंट करए अएलैक। पानमती ओकर पैर पकड़ि लेलकै। कानलागल। बाजल-हमरा अपन इलाकामे लचलू। ओहि ठाम काजक लोकक माँग छै।

    माइकें कनैत देखि, पूनम सेहो माइक बगलमे लोटि गेल। माइ बात दोहराबलागल।

    मंजूर अकचका गेल। बाजल-ओहि ठाम रहब कत’?

    -झुग्गीक किराया द। जेना अहाँ रहै छी।

    -झुग्गीक किराया आब बढ़ि गेलै अछि। पचास टाका मास। आ पचास टाका सलामी भिन्न।

    -देबै। जे नुआ फट्टा अछि, बेचि कदेबै।

   मंजूरक बहु किछु दिनसँ काज पर जाइ काल नाकर नुकर करहल छलै। हाथ-पैर झुनझुनाइत रहै। बदलामे पानमती सम्हारि देतै तदरमाहा नइं कटतै।

    सएह सोचि कमंजूर राजी भगेल। पानमती तखनहि बिदा हेबा लेल वस्तु जात बान्हलागल। रघुनाथकें खबरि दइ लए पूनमकें दौड़ा देलकै।

    -रघुनाथ काका! हमरा लोकनि गाम नइं जाएब।

    -किऐ?

    -मंजूर मामा लग रहब।

 

रघुनाथकें तखन सवारी रहै। ओ अधिक खोध वेध नइं केलकै। जागेश्वर प्रीतमपुरामे कत्ता बेर छानि मारलक। ने मंजूर भेटलै, ने पानमती, ने पूनम। अपने लोकबेद जएबासँ रोकै। बेर बेर बुझबै-केओ ककरो संग भागत, पुरान डीह पर थोड़े बसत। ओ ततेहेन ठाम जाएत, जतओकरा केओ नइं चीन्हइ। केहेन मूर्ख छें तों।

 

-महामूर्ख छी हम-जागेश्वर घाड़ नेरबैत बाजल। पूनम सेहो घाड़ नेरबैत बाजल-नइं। तों कदापि मूर्ख नइं छह। झुग्गी बना ककिराया लगएबाक विचार तोंही कएने छलह। हमरा लोकनि जे ठेला किनलहुँ, से जकरा चलबदेलिऐ, सएह लभागि गेल। माइ तनिश्चय कलेलक अछि, बिना रजिस्ट्रीक सब्जी दोकान नइं करत। आब तों आबि गेलह। तोंही दोकान चलएब। आदना लोककें नइं देबै।

पूनम अपन माइ दिस तकलक। माइ अपन पैरक औंठा दिस दृष्टि गड़ौने ओहिना ठाढ़ि रहए। पूनमकें आश्चर्य भेलै। पूछलकै-माइ! तों किछु बजै नइं छें?

एक क्षण आर चुप रहि, पानमती बाजल-सब्जी दोकानमे देरी छै। रुपैया जमा हैत, जगह भेटत, रजिस्ट्री हैत-एखन तनाम पर लगैत बट्टा बचएबाक अछि।

    -बट्टा?

    -नौ वर्षसँ एहि इलाकामे छी। सब जनैत अछि जे हमरा एक बेटी छोड़ि, आगू पाछू केओ नइं अछि। तखन एकटा पुरुष क्यो।

    -केओ एकटा पुरुष नइं। तोहर वर, आ हमर बाप थिक।

    -केओ नइं मानत। सब आंगुर उठाओत।

    -के आंगुर उठाओत? प्रति तेसर लोक जोड़ी बदलैत रहै अछि एतए।

    -तइं तककरो विश्वास नइं हेतै सत्य पर!-पानमती अइ बेर जागेश्वर दिस ताकि बाजल, बेटी लेल नीक घर वर चाहैत छी। एहने समयमे…

-माइ! एहेन कठोर जुनि बन। बाबू हारल थाकल अछि। कहियो तभरि गामक लोकसँ लड़ाइ कहमरा लोकनिकें एतअनलक। बेटी-पुतोहुकें बाहर पठएबा ले ने तोहर लोकवेद राजी रहौ, ने बाबूके। बाबू नइं अनैत तगाममे गोबर गोइठा करैत सड़ैत रहितहुँ आइ।

    -तोरा जनैत नीक दशा बनबै वाला तोहर बाप छौ। माइ जहन्नुममे देलकौ!

    -नइं माइ, नइं। हमर तात्पर्य से नइं छल। हमरा सन माइ ककरो नइं छै।

-गामसँ अनलक ठीके। बैसा कनइं खुऔलक। तहू दिनमे बासन मँजैत रही। आइयो सएह करैत छी। तहिया दू घर काज करैत रही, आइ तीन घर करैत छी।

    पूनमकें उत्तर नइं फुरलै। ओ दहो-बहो कानलागल। पानमती फेर अपन पैरक औंठा दिस ताकलागल।

जागेश्वर नइं सहि सकल। हाथसँ बेटीक मुँह पोछैत बाजल-चुप भजो। माइसँ बढ़ि कतोहर हित-चिन्तक आन नइं हेतौ। ओकर बातसँ बाहर नइं होइ। ओकरा खूब मानी। चलै छियौ।

    -नइं।-पूनम केर कोंढ़ फाटलगलै।

जागेश्वर बिदा भगेल। पानमती ठाढ़िए रहल। पूनम अपन माइकें बड्ड मानैत छल। कहियो कोनो विरोध नइं कएने छल। दरमाहा बख्शीस जे किछु भेटै, माइक हाथ पर राखि देअए। माइ प्रति बेर ओहिसँ किछु पूनमकें दैत कहै-ले अपन सौख-मनोरथ लेल राख।

    पूनम एकटा बटुआमे सौख मनोरथक रुपैया रखैत छल। पूनम फुर्तीसँ ओ बटुआ आ जलखैक एकटा पन्नी उठा बाहर दौड़ल।

जागेश्वर मंथर गतिसँ जा रहल छल। पूनम हाक देलकै-बाबू… कनेक बिलमि जा।-जागेश्वर थमि गेल। पूनम बटुआ ओकर हाथमे दैत कहलकै-ई एकदम हमर अपन पाइ थिक। तोरा लेल। जतबा दिन चल’, भूखल नइं रहिह

    -नइं, नइं। ई राख तों, हमरा काज भेटल अछि।

    -तैयो राखि लैह। तोहर बेटीकें संतोष हेतह। आइहो लैह। जे घड़ी ने कलमे पानि अएलहि अछि। हाथ मुँह धो कपेटमे धलैह।

    -एतेक मानै छें हमरा?-जागेश्वर आर्द्र कंठसँ बाजल।

-तों कोनो कम मानै छ’, हमरा राति कखिस्सा कहैत रह। गीत सुनबैत रह। कतेक दुलार-मलार करैत रह। कहियो नइं बिसरल। ने कहियो बिसरत।-पूनम फेर कानलागल।

जागेश्वर हाथसँ नोर पोछि देलकै। बाजल किछु नइं। पूनम अवरुद्ध कंठसँ कहलकै, दू सौ सत्तासी नम्बर वैशाली नगरमे हम काज करैत छी। फाटक पर घरवैयाक नाम पता लिखल छै। ओहि ठाम चिट्ठी दिह। नीक आ अधलाह सब हाल लिखिह। आर एकटा बात…

    -की?

-माइकें माफ कदिहक। कठोर मेहनति करैत-करैत ओकर मोन कठोर भगेलै अछि। मुदा हमरा विश्वास अछि जे एक दिन ओ पिघलत। आहमरा लोकनि पहिने जकाँ संग रहलागब, प्रेमसँ।

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