VIDEHA

Archive for the ‘विनीत उत्पल’ Category

समाजक ई चेहरा

In कविता, मैथिली, विनीत उत्पल on October 7, 2009 at 1:43 am
इहो अछि एहि समाजक चेहरा
दिल्लीक बाट पर, बत्ती लाल भेलाह पर
इंदौर स निजामुद्दीन वा पटना स दिल्लीक लेल ट्रेन पकड़बाक पर
आआ॓र फेर घरक दुआरि पर
दस्तक दैत देखबाक मे आबैत अछि आ॓

नहि तऽ पुरूष अछि आ नहि एकटा स्त्री
भरसक शारीरिक तौर स
मुदा मन बा अभिनयक चेहरा
रहैत अछि अलग-अलग स
जे कि हुनकर की नाम देल जाए

मायक कोख स इहो लेल जनम
भाई-बहिनक संग पलल-बढ़ल
स्कूल मे पढाईक सीढ़ी चढ़ल
मुदा, फारम भरैत काल
खसल भारी विपैत

कियाकि आपशन छल दू टा
स्त्री वा पुरूष
तखन शुरू भेल हुनकर
सामाजिक बहिष्कार
नहि घरक रहल नहि रहल घाटक

परिस्थिति सभकऽ
जीयब सीखा दैत छैक
ताहि लेल
देखबाक में आबैत अछि
बाट सऽ लऽ कऽ ट्रेन तक।

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.