साँच जिनगी मे बीतल जे गाबैत छी। कहू माता के आँचर मे सुख जे भेटल। खूब बचपन मे खेललहुँ बहिन भाय संग।
वेदना अछि हृदय मे सुनावैत छी।।
साँच जिनगी———-
चढ़ैत कोरा जेना सब हमर दुख मेटल।
आय ममता उपेक्षित कियै राति दिन।
सोचि कोठी मे मुँह कय नुकाबैत छी।।
साँच जिनगी———-
प्रेम सँ भीज जाय छल हरएक अंग अंग।
कोना संबंध शोणित के टूटल एखन?
एक दोसर के शोणित बहाबैत छी।।
साँच जिनगी———-
कटत जिनगी सुमन के बगीचे के बीच।
बात घर घर के छी इ सोचब ध्यान सँ।
स्वयं दर्पण स्वयं केँ देखाबैत छी।।
साँच जिनगी———-
Archive for the ‘श्यामल सुमन’ Category
संबंध- श्यामल सुमन
In श्यामल सुमन, संबंध on May 4, 2009 at 10:20 amदूर अप्पन कियै अछि पड़ोसी लगीच।
