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हंसराज- ईश्वर

In ईश्वर, हंसराज on October 9, 2009 at 1:47 am

ईश्वर
पहाड़क खाधिमे जनमल
एहि गोबरछत्ताक एकटा दोगमे
शरशय्या पर पड़ल
अहर्निश उकासी,
भरि अढ़िया कफ आ रक्तक वमन;
दस टा रोगग्रस्त बन्धुक बीच
एकसर हम सोचि रहलहुँ–
यन्त्राणाक सीमा ईश्वर!

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