उदय चन्द्र झा “विनोद”
हम लिखैत छी कविता
सूर्यकेँ अर्घ्य दैत छी
ककरो किछु फर्क भने नइँ पड़ौक
हमरा पड़ैत अछि
अहाँ पढ़ू वा नहि
हमरा लिखय पड़ैत अछि
हमरा लेल कविता लिखब
आइयो अछि आवश्यक
परमावश्यक अछि जीवाक लेल।
उदय चन्द्र झा “विनोद”
हम लिखैत छी कविता
सूर्यकेँ अर्घ्य दैत छी
ककरो किछु फर्क भने नइँ पड़ौक
हमरा पड़ैत अछि
अहाँ पढ़ू वा नहि
हमरा लिखय पड़ैत अछि
हमरा लेल कविता लिखब
आइयो अछि आवश्यक
परमावश्यक अछि जीवाक लेल।
| raj mishra on अफरल पेट- मनीष झा "बौआ… | |
| sourav894 on About | |
| PRAVEEN KUMAR KARN on मिथिलांगन- मैथिली भाषा पारिवार… | |
| satendra chauhan on आशीष अनचिन्हार- गजल | |
| Akash Kumar on नताशा 01 (चित्र-श्रृंखला पढ़बाक… |
Read in your own script
Roman(Eng)
Gujarati
Bangla
Oriya
Gurmukhi
Telugu
Tamil
Kannada
Malayalam
Hindi
Via chitthajagat.in
| M | T | W | T | F | S | S |
|---|---|---|---|---|---|---|
| « Dec | ||||||
| 1 | 2 | 3 | ||||
| 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 |
| 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 |
| 18 | 19 | 20 | 21 | 22 | 23 | 24 |
| 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | |
Blog at WordPress.com. Theme: DePo Masthead by Automattic.